साइबर अपराध

असल में, साइबर अपराध बढ़ते रहते हैं क्योंकि यह अपराध करने का सबसे आसान स्रोत माना जाता है और जिन लोगो को कंप्यूटर के बारे में बहुत अधिक ज्ञान है लेकिन उन्हें कोई नौकरी नहीं मिल रही है या उनके पास इतना पैसा नही हैं तो वे इस स्रोत के साथ जाते हैं और नकारात्मक तरीके से इंटरनेट का उपयोग करना शुरू कर देते हैं। साइबर अपराधियो के लिए यहां से डेटा का उपयोग करना आसान है और फिर इसका उपयोग पैसे निकालने या ब्लैकमेलिंग और अन्य अपराधों के लिए करना आसान है। साइबर अपराधी बढ़ रहे हैं क्यों कि उन्हें पकडे जाने का इतना खतरा नहीं है क्योंकि वे नेटवर्किंग सिस्टम में बहुत विशेषज्ञ हैं जो वे सुरक्षित महसूस करते है। यहांतक कि वे ही हैं जो फर्जी खाता भी बनाते हैं और फिर अपराध करते हैं। कई प्रकार के साइबर अपराध है, इसलिए लोग इसे सिर्फ एक अर्थ में उपयोग नही करते हैं, जैसे धोखाधड़ी, पीछा करने, उत्पीड़न, मॉर्फिग, बदमाशी, ईमेल-स्पूफिग, मानहानि, हैकिंग आदि। कंप्यूटर या स्मार्ट फोन उपयोगकर्ताओ को दुरुपयोग किए जाने या अपने सिस्टम और नेटवर्क की रक्षा करने के तरीके के बारे में पता नही है। साइबर अपराधियों को पकड़ना आसान नही होता, उन्हें पकड़ने में समय लगता है।
भविष्य का खतरा –
भारत 560 मिलियन से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओ के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन बाजार है, केवल चीन से पीछे है। और यह अनुमान लगाया गया है कि 2023 तक, देश में 660 मिलियन से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता होंगे। साइबरस्पेस में कोई सीमा नही है-खतरे और हमले किसी भी समय किसी भी स्थान से आ सकते हैं, जिससे पुलिस के लिए चुनौतिया पैदा हो सकती हैं क्योंकि घटनाओ में संदिग्ध, पीड़ित और कई देशो में फैले अपराध शामिल हो सकते हैं।
बेरोजगारी के मुद्दे के लिए उपाय –
युवाओं को स्कूल और कॉलेज स्तर पर अधिक कौशल प्रशिक्षण मिलना चाहिए रोजगार के अनुसार योग्यता बड़ा मामला है जिसे संबोधित किया जाना चाहिए। युवाओं को गैर-सरकारी संगठन, स्व-रोजगार जैसे अधिक उपयोगी कार्यों में लगाया जाना चाहिए। अर्थव्यवस्था को अधिक रोजगार-उन्मुख विकास पर निर्देशित किया जाना चाहिए।

  1. वर्तमान बदलते परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका ?
    परिचय :- वर्तमान परिदृश्य में बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के साथ, यूएनएससी (UNSC) का महत्व लगातार बढ़ रहा है। मानवाधिकारों की सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति से संबंधित चिंताएँ और चुनौतियों आज के क्षेत्र में उभरी हैं। अफगानिस्तान में तालिबान का पुनरुत्थान, म्यांमार तख्तापलट, इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष, यूएसए-रूस-यूक्रेन संघर्ष आदि। ऐसी सभी घटनाओ ने धीरे-धीरे अंर्तराष्ट्रीय शांति के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
    UNSC का गठन – UNSC, जो 1946 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक शाति स्थापित करने और वैश्विक सुरक्षा को बनाए रखने के इरादे से लागू हुआ था, समय के साथ अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को अपनी बाधित संरचना और अनुचित कार्यप्रणाली के कारण खोता जा रहा है | UNSC एकमात्र संयक्त राष्ट्र निकाय है जिसके पास सदस्य देशों को बाध्यकारी प्रस्ताव जारी करने का अधिकार है।
    वर्तमान वैश्विक चुनौतियां – 1. रूस यूक्रेन सीमा संघर्ष – हाल ही में, रूस-यूक्रेन सीमा के बीच तनाव इस क्षेत्र के लिए एक बड़े सुरक्षा संकट का प्रतिनिधित्व करता है। रूस और अमरीका दोनो यूक्रेन के लिए लड़ रहे हैं और गंभीरता का सामना कर रहे हैं। अफगानिस्तान में तालिबान का पुनरुत्थान- दोहा समझौते के बाद अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी, की वजह से क्षेत्र में संघर्षों की एक शुरू हो गई है लगातार महिलाओं, बच्चों और अफगानिस्तान के लोगों के अधिकारों का शोषण हो रहा है और स्थिति अभी भी बदतर है। 2. सूडान संकट – हाल ही में सूडान में इसके नागरिक प्रधान मंत्री अब्दुल्ला हमदोक ने इस्तीफा दे दिया जिससे देश अस्थिर हो गया। उन्होने अपने पद से इस्तीफा दिया क्योंकि देश में सेना विरोधी प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे थे। सूडानी लोकतंत्र समर्थक समूहो ने सेना के साथ हमदोक के समझौते को खारिज कर दिया और जनरलों ने मांग कि एक स्वतंत्र नागरिक प्राधिकरण को सत्ता सौंप दी जाये । इस घटना से क्षेत्र में खलबली मच गई है। 3. म्यांमार तख्तापलट – म्यांमार में एक तख्तापलट तब शुरू हुआ जब देश की सत्ताधारी पार्टी, नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए सदस्यों को म्यांमार की सेना द्वारा हटा दिया गया था और तब से यातनाओ, हत्याओं की एक श्रृंखला का दौर शुरू हो गया है जिसने देश में गृहयुद्ध की शुरुआत कर दी।
  2. राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनारू प्रकृति और उद्देश्य ।
  3. राज्य की आबादी में लगभग 70 फीसदी आबादी का जीवन-यापन कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर आधारित है। कृषि के काम में बड़ी संख्या में भूमिहीन श्रमिक जुड़े हैं। कृषि मजदूरी कार्य में संलग्न ग्रामीणो में अधिकतर लघु, सीमांत अथवा भूमिहीन कृषक हैं।
  4. छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ सत्र में ही कृषि मजदूरी के लिए पर्याप्त अवसर रहता है। रबी सत्र में फसल क्षेत्राच्छादन कम होने के कारण कृषि मजदूरी के लिए अवसर भी कम हो जाता है।
  5. राज्य शासन द्वारा ऐसे वर्ग को संबल प्रदाय करने की दृष्टि से “राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना वित्तीय वर्ष 2021-22 से प्रारंभ किया जा रहा है।
  6. पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानो को रु. 6000/- सालाना और अब इस योजना के तहत भूमिहीन श्रमिको को रु. 8000/- सालाना राज्य सरकार ने रुपये का प्रावधान किया है। जिस तरह से किसानो को मिली आर्थिक मदद ने बाजार को संबल दिया है, उसी तरह भूमिहीन कृषि मजदूरों को मिली आर्थिक मदद भी ग्रामीण अंचल में अर्थव्यवस्था को गति देने का माध्यम बनेगी।
  7. ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और गरीबो को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली सरकार की यह तीसरी न्याय योजना है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना राज्य में पहले से चल रही है।
  8. योजना का उद्देश्य 1. ग्रामीण क्षेत्र में भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारो की पहचान करना तथा भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारो को वाषिक आधार पर
  9. आर्थिक अनुदान उपलब्ध कराना। आर्थिक अनुदान के माध्यम से भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारो के शुद्ध आय में वृद्धि करना।
  10. 2.
  11. हितग्राही परिवार की पात्रता 1. योजनांतर्गत कट ऑफ डेट (पात्रता दिनाक) 01 अप्रैल 2021 होगा अर्थात् दिनाक 01 अप्रैल 2021 की स्थिति में योजनांतर्गत
  12. निर्धारित पात्रता होनी चाहिए। योजना अंतर्गत पात्रता केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासियो को होगी। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे सभी मूल निवासी भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र होंगे, जिस परिवार के पास कृषि भूमि नही है। पट्टे पर प्राप्त शासकीय भूमि यथा वन अधिकार प्रमाण पत्र को कृषि भूमि माना जाएगा।

सुरक्षा परिषद की निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता की कमी है और साथ ही सुरक्षा परिषद के विस्तार पर कोई प्रगति नहीं हुई है। संयुक्त राष्ट्र के बाहर शक्तिशाली क्षेत्रीय सुरक्षा गठबंधनों जैसे नाटो (NATO) क्वाड (QUAD), ऑक्स (AUKUS), आसियान क्षेत्रीय मंच (ASEANREGIONAL FORUM) आदि के विकास ने भी सुरक्षा परिषद के महत्व को कम करने में बहुत योगदान दिया। इन गठबंधनो का विकास न केवल सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के बीच एकता की कमी का संकेत दर्शाता है, बल्कि सामूहिक सुरक्षा के साधन के रूप में सुरक्षा परिषद की प्रभावकारिता में सदस्यों के विश्वास की कमी भी बताता है ।
वर्तमान परिदृश्य में UNSC की भूमिकाUNSC की प्रमुख भूमिका शांति अभियानो की स्थापना, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधो को लागू करना और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के माध्यम से सैन्य कार्रवाई को अधिकृत करना है, लेकिन ऐसी सभी शक्तियो के बजाय UNSC अपने उद्देश्य को पूरा करने में पिछड़ रहा है और किसी तरह अपना खो देता है वैश्विक क्षेत्र में विश्वसनीयता। 1. क्षेत्र में गंभीर परिस्थितियो के संदर्भ में बाध्यकारी प्रस्तावो को पारित किया जाना चाहिए।
UNSC द्वारा लिया गया निर्णय उसके मूल उद्देश्य पर आधारित होना चाहिए। UNSC को संकल्प, बयान और कोई भी निर्णय लेने में निष्पक्ष होना चाहिए। हाल ही में हमने कई गंभीर घटनाएं देखी हैं जिनमें यूएनएससी (UNSC) से सिर्फ निंदा और बयान आए हैं. वीटो शक्तियों के कारण कोई प्रभावी प्रस्ताव नही है, इसलिए यूएनएससी (UNSC) की शिथिलता और निष्पक्ष कार्यप्रणाली को वर्तमान परिदृश्य में बदलने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष/आगे का रास्ता –
वर्तमान बदलते वैश्विक परिदृश्य में UNSC को निर्णय-आधारित कार्रवाई करनी चाहिए जो अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए केवल प्रस्तावों और बयानों को पारित करने के बजाय क्षेत्र की स्थितियो और स्थिति को बदलने में सक्षम हो सकती है। वर्तमान परिस्थितियो में, यूएनएससी के लिए खुद को सुधारना और दुनिया में अपनी वैधता और प्रतिनिधियो को बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है। हालाँकि, ऐसा होने के लिए, विशेष रूप से P-5 राष्ट्र की राजनीतिक इच्छाशक्ति और सभी देशो के बीच मजबूत सहमति समय की आवश्यकता है।

स्पष्टीकरण-(3) यहाँ परिवार से आशय-किसी व्यक्ति का कुटुम्ब अर्थात- उसकी पत्नी या पति. संतान तथा उन पर आश्रित माता-पिता से है। स्पष्टीकरण-(4) यहाँ कृषि भूमि धारण नही करना, से आशय है उस परिवार के पास अंश मात्र भी कृषि भूमि नहीं होना है।
कृषि भूमिहीन परिवारों की सूची में से परिवार के मुखिया के माता या पिता के नाम से यदि कृषि भूमि धारित है अर्थात् उस परिवार को उत्तराधिकार हक में भूमि प्राप्त करने की स्थिति होगी, तब वह परिवार भूमिहीन परिवार की सूची से पृथक् हो जाएगा। आवासीय प्रयोजन हेतुधारित भूमि, कृषि भूमि नही मानी जाएगी। ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारो के मुखिया को अनुदान सहायता राशि प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र के साथ “राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना’ पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अपंजीकृत परिवारो को योजनांतर्गत अनुदान की पात्रता नहीं होगी। पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाने पर उक्त परिवार के द्वारा पात्रता अनुसार नवीन आवेदन योजनांतर्गत प्रस्तुत किया जाना होगा। यदि पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया के द्वारा असत्य जानकारी के आधार पर अनुदान सहायता राशि प्राप्त की गई हो, तब विधिक कार्यवाही करते हुए उक्त राशि उससे भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल की जाएगी।
योजना का कार्यक्षेत्र – योजना प्रदेश के समस्त जिलों में वित्तीय वर्ष 2021-22 से लागू होगी। क्रियान्वयन एजेन्सी – राज्य स्तर पर आयुक्त/संचालक भू-अभिलेख तथा जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की देख-रेख में योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। अनुदान सहायता राशि – योजना अंतर्गत अंतिम रूप से चिन्हांकित हितग्राही परिवार के मुखिया को राशि रूपए 8000/अनुदान सहायता राशि प्रति वर्ष दी जाएगी।
भूमिहीन मजदूर प्रायः/अक्सर हमारे समाज के सबसे अधिक उपेक्षित और शोषित वर्ग के लोग होते है। निःसंदेह इन लोगो ने हमारे राष्ट्र की प्रगति में बहुमूल्य योगदान दिया है किन्तु आज भी इनकी सामाजिक आर्थिक परिस्थितिया बहुत खराब है। आजादी के बाद से, इन लोगो के विकास के लिए उचित वातावरण बनाने के प्रयास किये जाते रहे हैं।
इस योजना से मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र में कृषि श्रमिक कार्य पर निर्भर लाभार्थियो और मनरेगा के श्रमिको को लाभ होगा छत्तीसगढ़ राज्य में राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के अंतर्गत लगभग 3 लाख 55 हजार ऐसे परिवार पंजीकृत

स.
इंटीग्रेटेड पैक योजना – उत्पादों की पैकिंग, प्रोसेसिंग, छंटाई आदि के लिए दुर्ग में स्थापित करने की योजना। मुख्यमंत्री रेशम मिशन – बुनकरों, हथकरघा उद्योगों, लघु व कुटीर उद्योगों को निर्भर बनाने यह मिशन लागू। इसके अंतर्गत रेशम से धागा बनाने, प्रोसेसिंग आदि का कार्य अब छत्तीसगढ़ में ही होगा।

  1. महिलाओं के लिए प्रावधान – महिलाओं को सशक्त बनाने तथा आर्थिक संवृद्धि का हिस्सा बनाने के लिए स्य.सहायता समूहों के 12लाख 74 हजार का ऋण माफ किया गया तथा महिला कोष में 30 प्रतिशत की वृद्धि की गई।
  2. सुपोषण – एनीमिया व कुपोषण जैसी समस्याओं को दूर करने हेतु 1067 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है पिछले 3 वर्षों में कुपोषण की दर में 8.74 प्रतिशत की कमी आयी है।
  3. शिक्षा – बच्चों को शिक्षित करने तथा शिक्षा की उचित सुविधा उपलब्ध कराने हेतु 171 स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल तथा इस सत्र से 32 स्वामी आत्मानंद हिन्दी मीडियम स्कूल आरम्भ।
  4. स्वास्थ – स्वास्थ सुविधाओं को प्रभावी बनाने हेतु 60 मोबाईल एंबुलेंस तथा श्री धन्वन्तरी मेडिकल स्टोर्स की स्थापना इसके अतिरिक्त दाई- दीदी क्लीनिक जैसी योजनाएँ महिलाओं को केन्द्रित कर क्रियान्वित किया जा रहा है।
  5. पंचायत एवं ग्रामीण विकास – बजट 2022-23 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास हेतु 1063 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। अ. उत्थान योजना
    मिलाप योजना स. जिला/जनपद प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि। द. विद्यालय निधि की राशि 2 करोड़ से बढ़ाकर 4 करोड़।
  6. खेल एवं युवा विभाग – युवा वर्गों के लिए समाज में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राजीव युवा मितान क्लब स्थापित ।
    अ. मलखंभ एकेडमी – नारायणपुर 9. जनजातीय क्षेत्र – नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य नक्सली गतिविधियों के कारण सर्वाधिक प्रभावित होता है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बजट में 1407 करोड़ रूपए का प्रावधान स्टील ब्रिज के निर्माण हेतु किया गया है।
  7. सी-मार्ट – ग्रामीण उत्पादों, लघु – वनोपज उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने हेतु सभी शहरों में सी-मॉर्ट की स्थापना करने का प्रावधान। इसके अलावा उत्पादों की ब्राडिंग “छत्तीसगढ़ हर्बल” के नाम से किया जाना सुनिश्चित किया गया है।

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