COMPUTER

एप्लाईड एवं व्यवहारिक विज्ञान
| 1. ग्रामीण भारत में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका, कम्प्यूटर का आधारभूत ज्ञान, संचार एवं प्रसारण में कम्प्यूटर, आर्थिक वृद्धि
हेतु सॉफ्टवेयर का विकास, आई.टी.. के वृहद अनुप्रयोग।

  1. ऊर्जा संसाधन-ऊर्जा की मांग, नवीनीकृत एवं अनवीनीकृत ऊर्जा के स्त्रोत, नाभिकीय ऊर्जा का देश में विकास एवं उपयोगिता।
    भारत में वर्तमान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास, कृषि का उदभव, कषि विज्ञान में प्रगति एवं उसके प्रभाव, भारत में फसल विज्ञान, उर्वरक, कीट नियंत्रण एवं भारत में रोगों का परिदृश्य।
  2. जैव विविधता एवं उसका संरक्षण- सामान्य परिचय-परिभाषा, अनुवांशिक प्रजाति एवं पारिस्थितिक तंत्रीय विविधता। भातर
    का जैव-भौगोलिक वर्गीकरण। जैव विविधता का महत्व – विनाशकारी उपयोग उत्पादक उपयोग, सामाजिक, नैतिक, वैकल्पिक दृष्टि से महत्व। विश्व स्तरीय जैव विविधता, राष्ट्रीय एवं स्थानीय स्तर की जैव विविधता। भारत एक वृहद् विविधता वाले राष्ट्र के रूप में। जैव विविधता के तप्त स्थल । जैव विविधता को क्षति-आवासीय, क्षति, वन्य जीवन को क्षति, मानव एवं वन्य जन्तु संघर्ष। भारत की संकटापन्न (विलुप्त होती) एवं स्थानीय प्रजातियां । जैव-विविधता का संरक्षण – असंस्थितिक एवं संस्थितिक संरक्षण।
    पर्यावरण प्रदूषण – कारण, प्रभाव एवं नियंत्रण के उपाय-वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, तापीय प्रदूषण, नाभिकीय प्रदूषण। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नगरीय एवं औद्योगिक ठोस कूड़े-करकट का प्रबंधन : कारण, प्रभाव एवं नियंत्रण। प्रदषण के नियंत्रण में व्यक्ति की भूमिका।

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